Tuesday, June 25, 2013








और अब राहुल गांधी ..!
मित्रों इन तस्वीरों पर क्लिक करें और जाने नेताओं की करतूतें ।
क्या कांग्रेस के सतपाल महाराज , क्या बी जे पी के अजय भट्ट ।
और अब राहुल गांधी सभी फ्री फंड के हवाई सफर के मजे लूट रहे हैं।
ऊपर वाले को भी हमारे फौजियों का ही हेलीकाप्टर मिला क्रैश करने को ।
पर सुनते आयें हैं कि ऊपर वाले को भी भले लोगों की जरूरत होती है ।
सुना है कि नंगे से तो भगवान  भी डरता है । 

नरेंद्र मोदी - नरेंद्र मोदी - नरेंद्र मोदी !


नरेंद्र मोदी - नरेंद्र मोदी - नरेंद्र मोदी !

 

अब तो शिव सेना भी एन दी ए के घटक दल के नाते नरेंद्र मोदी को लेकर चिंता दिखा चुकी है। लगता है की मोदी जी भी उसी बीमारी के शिकार हो रहे हैं जिसके शिकार राहुल गांधी सहित सारे कांग्रेसी नेता हैं।    मोदी जी ने उत्तराखंड के दौरे के बाद कहा की उन्होने 15000 गुजरातियों को आपदा से बचा लिया। इस पर शिव सेना ने कहा की मोदी जी अब केवल गुजरात के नेता नहीं हैं, वो अब पूरे देश के नेता हैं और उन्हे अब सारे देश को साथ लेकर चलने की बात करनी चाहिए न की सिर्फ गुजरात की।  मोदी जी का पी आर ओ संभालने वाले इस बात का ध्यान रखें कि इससे बी जे पी या  नरेंद्र मोदी को फायदे की जगह सिर्फ नुकसान ही होगा । इससे उनकी छवि निखरने की बजाए धूमिल ही होगी। 

अब ये अलग बात है कि 15000 लोगों को मोदी जी ने किस तरह बचाया होगा।
वो भी सिर्फ 2 दिन (वो भी पूरे नहीं) और एक रात में। वास्तव में मोदी जी के राजनीतिक प्रबंधन  और मीडिया मैनेजरों की बुद्धिमत्ता पर तरस आता है। वे ये फैसला नहीं कर पा रहे हैं कि कब और किस मौके पर क्या बोलना है। मोदी जी देश को नेत्रत्व देने की मंशा रखते हैं। पर राष्ट्रीय नेत्रत्व वाली बात कहीं नज़र नहीं आ रही । जब देखो वे कांग्रेस और राहुल  गांधी के पीछे पड़े रहते हैं। ऐसे करके वे बेवजह कांग्रेस व राहुल गांधी का एक प्रकार से प्रचार ही करते हैं।  होना तो ये चाहिए कि वो देश की जनता के सामने अपना विज़न रखें कि वो देश की किस प्रकार और कैसे सेवा कर सकते हैं ।  राष्ट्र हित के विभिन्न मुद्दों पर वे क्या सोचते हैं, किस प्रकार वे देश की युवा शक्ति को रचनात्मक दिशा दे सकते हैं। हिमालयी राज्यों के विकास के बारें में उनकी क्या सोच है। राष्ट्रीय आपदाओं से होने वाले नुकसान को किस तरह कम किया जा सकता है।  

Saturday, May 25, 2013

आम आदमी !

आजादी के साठ सालों के बाद भी इस देश के आम आदमी (आम आदमी से मेरा मतलब नेताओं और दबंगों के


अलावा सभी) की जिन्दगी आज भी इतनी बेचारी, खीज भरी और बेबस हैघर से निकलते ही चाहे आर टी


मे लाईसेंस बनवाना हो, प्राइवेट स्कूलों की फीस के लिए पैसों का जुगाड़ करना हो, एक अदद घर का नक्शा

पास करवाने के लिए जे की खुशामंद (वरना मोटी रिश्वत का इंतजाम करो) करनी हो, पुलिस थाने में कोई


कम्प्लेंट लिखवानी हो और अगर इन सबसे वक्त बचे तो अपने काम धंदे को देखे ताकि घर परिवार चलाने के


लिए दो पैसे कमा सकेमेरा मतलब ये नहीं है कि ये सब काम के लिए आकाश से उतर कर कोई आएगा


करना तो हमें ही है लेकिन इन सब के लिए रोजाना जो अपमान झेलने पड़ते है उन सबसे एक व्यक्ती की


आत्मा पर जो घाव लगते है उससे अहसास होता है कि क्या हम आजादी के साठ सालों बाद भी वास्तव में


आज़ाद हो सके हैऔर ये सब क्या कम था जो अब व्यक्ति की सुरक्षा भी रोजाना घर से निकलते ही दांव पर


लगी रहती हैकभी बेतरतीब ट्रैफिक में दुर्घटना, कभी आतंकवादकब कहाँ कौन आतंकवाद या दुर्घटना की


भेंट चढ़ जाए क्या पतासुबह घर से निकल कर शाम को सही सलामत घर आजाये तो ठीक वरना...........



     असल में तकलीफ तो तब होती है जब नेताओं और दबंगों या प्रभावशाली लोगों के काम घर बैठे ही

होजातें हैं और एक आम आदमी दर दर ठोकरें खाता फिरता है और फिर भी उसके काम नहीं होते,